_____शैतान ______

_____शैतान ______

_____शैतान ______

अब वो काले कपड़े नहीं पहनता

क्यूंकि तांडव का कोई ख़ास रंग नहीं होता

ये काला भी हो सकता है और लाल भी

भगवा भी और हरा भी.

अब वो आँखों में सुरमा भी नहीं लगाता

अब वो हवा में लहराता हुआ भी नहीं आता

ना हीं अब उसकी आँखें सुर्ख और डरावनी दिखतीं हैं

वो अब पहले की तरह चीख़-चीख़कर भी नहीं हँसता

ना हीं उसके लम्बे बिखरे बाल होते हैं अब.

क्यूंकि इस दौर का शैतान

इंसान की खाल में खुलेआम घूमता है

वो रहता है हमारे जैसे घरों में

खाता है हमारे जैसे भोजन

घूमता है टहलता है

ठीक हमारी ही तरह सड़कों पर

और मज़ा तो ये

कि वो अखबार में भी छपता है

टी.वी. में भी आता है.

लेकिन अब उसे कोई शैतान नहीं कहता

क्यूंकि उसके साथ जुड़ी होती हैं जनभावनाएँ

लोग उसे “सेवियर” समझते हैं

और अब अदालतें भी कहाँ

सच और झूठ पर फैसले देतीं हैं साथी ?

अब तो गवाह और सबूत एक तरफ़

और सामूहिक जनभावनाएँ दूसरी तरफ.

अब इस अल्ट्रा मॉडर्न शैतान की शैतानियाँ

नादानियाँ कही जाती हैं

क्रिया-प्रतिक्रिया कही जातीं हैं.

इस दौर का शैतान बेहद ख़तरनाक है

क्यूंकि अब उसकी कोई ख़ास शक्ल नहीं होती

वो पल-पल भेस बदले है साथी

वो तेरे और मेरे अन्दर भी

आकर पनाह लेता है कभी-कभी

अब ज़रूरत इस बात की है

कि हम अपने इंसानी वजूद को बचाने के लिए

छेड़ें इस शैतान के साथ

एक आख़िरी जिहाद

एक आख़िरी जंग

इससे पहले की बहुत देर हो जाए…

अदनान कफील दरवेश

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Updated : 5 April 2022 3:34 PM GMT

Shubham Gote

Mr. Shubham Gote is involved in the day-to-day operations of the company along with the business expansion strategies of the print media division of the group. He also supervises the performance of the company in terms of the business plans. He has been on the Board of the Company since November 2009.

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