स्वास्थ्य की दृष्टि से रमज़ान के रोज़े बहुत महत्वपूर्ण हैं

स्वास्थ्य की दृष्टि से रमज़ान के रोज़े बहुत महत्वपूर्ण हैं

स्वास्थ्य की दृष्टि से रमज़ान के रोज़े बहुत महत्वपूर्ण हैं

————– डॉ एम ए रशीद, नागपुर

पवित्र क़ुरआन की सूरा अल-बकर की पंक्ति क्र. 184 में अल्लाह का आदेश है कि ” … अगर तुम समझदार हो तो रोज़ा रखना तुम्हारे हक़ में बहरहाल अच्छा है” । यदि हम पवित्र क़ुरआन की इस वर्णित तथ्यों का चिकित्सकीय दृष्टि से अध्ययन करें तो यह स्पष्ट हो जाता है कि रोज़े इबादत के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य के लिए भी बहुत उपयोगी हैं। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए बहुत कम लोग अपनी देखभाल करते हैं। बहुत सी अनियमितताएं बरत कर शरीर को हानियां और रोगों का शिकार बना लेते हैं । रोगों से पीड़ित होकर लाइलाज और भयंकर रोगों से ग्रस्त हो जाते हैं।

स्वास्थ्य की दृष्टि से रमज़ान के रोजे बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब सभी सामूहिक रूप से एक माह तक रोज़े रखते हैं तो इबादतों में मुक़ाबला होता है । इबादत की राह में वे स्वत: फ़िज़ूल बातों , कामों से बचने लगते हैं । इस प्रकार इबादत के साथ साथ स्वस्थ के असीमित पहलुओं का शरीर पर प्रभाव पड़ने लगता है । रोज़े रखने से मस्तिष्क की कोशिकाएं अधिक संख्या में बनने लगती हैं और मस्तिष्क बेहतर ढंग से काम करने लगता है। रमजान में इफ़्तार का समय बड़ा मूल्यवान होता है । इस दौरान खजूर के इस्तेमाल के कई चिकित्सकीय लाभ होते हैं। खजूर न केवल ऊर्जा का स्रोत बनते हैं बल्कि वे मानव शरीर में पोटेशियम, मैग्नीशियम और विटामिन जैसे विभिन्न रासायनिक यौगिक भी प्रदान करते हैं। इसके अलावा, खजूर मानव शरीर को वह फाइबर प्रदान करते हैं जिसकी उसे आवश्यकता होती है, इस से पाचन तंत्र बेहतर और महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हदीस ग्रंथ सुनन इब्ने माजा की 1699 के अनुसार पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया – “जब तुममे से कोई रोजा इफ्तार करने लगे तो खजूर से इफ्तार करे और अगर खजूर न मिले तो पानी से करे, इसलिए कि वो पाकीज़ा चीज हैं। लेकिन इफ्तार में इसके अलावा विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का सेवन आमाशय और शरीर को बहुत क्षति पहुंचाते हैं उन से बचने की अत्यधिक आवश्यकता है ।

रमजान के रोजे से बहुत से फायदे दिखाई देते हैं जिनमें कुछ इस प्रकार हैं कि –

पाचन तंत्र को मिलता है विश्राम — सर्वप्रथम यह कि रोज़े रखने से पूरे पाचन तंत्र को एक महीने का आराम मिलता है। यकृत पर विशेष रूप से आश्चर्यजनक प्रभाव पड़ता है, यकृत भोजन को पचाने के अलावा बहुत से अन्य कार्य भी करता है जिस कारण उसे थकान का सामना करना पड़ता है। फिर रोज़े रखने से यकृत को चार से छह घंटे का आराम मिलता है । वैज्ञानिक दृष्टिकोण से चिकित्सीय विशेषज्ञों का दावा है कि यह विश्राम की अवधि वर्ष में एक माह ज़रूर होनी चाहिए। विश्राम के कारण ही वह आसानी से और बड़ी मात्रा में रक्त का उत्पादन कर लेता है ।

विषाक्त पदार्थों से छुटकारा — रोजे के बिना मानव शरीर की शक्ति और ऊर्जा केवल पाचन तंत्र के कारण खर्च होती है। लेकिन 12 घंटे के रोजे के बाद शरीर की ऊर्जा पाचन तंत्र की दिशा में काम नहीं करती है। 12 घंटे के रोजे के बाद मानव शरीर में विषाक्त पदार्थ और अन्य हानिकारक पदार्थ नष्ट हो जाते हैं। इस प्रकार शरीर को अपशिष्ट उत्पादों से छुटकारा मिलता है। इस दौरान अपने चिकित्सक की सलाह के अनुसार प्रोबायोटिक सप्लीमेंट्स का उपयोग भी पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

बुढ़ापे की रोकथाम करते हैं रमज़ान के रोज़े — रमज़ान के रोज़े रखने से व्यक्ति कमजोर हो जाता है, यह धारणा सही नहीं है। रोज़े रखने से व्यक्ति में बुढ़ापे से रोकने में सफ़लता मिलती है । रोज़े रखने से इंसान की त्वचा मजबूत होती है और झुर्रियां भी कम होती हैं। रोज़े के दौरान मानव शरीर में उम्र बढ़ाने वाले हार्मोन सक्रिय हो जाते हैं।

अनुसंधानों में रोजा रखने के चिकित्सकीय लाभ दिन प्रतिदिन सामने आ रहे हैं। रोज़े कैंसर, हृदय रोग और धमनी रोग के विरुद्ध भी एक ढाल है।

रोजों से हृदय को मिलता है बहुत लाभ और आराम — रोजों के मध्य हृदय को बहुत लाभकारी आराम मिलता है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि कोशिकाओं के बीच अंतरकोशिकीय द्रव की मात्रा में कमी के कारण कोशिकाओं की प्रक्रिया अधिक शिथिल हो जाती है। इसी बीच डायस्टोलिक दबाव भी हमेशा निम्न स्तर पर होता है, अर्थात हृदय उस समय आराम पर होता है। इसके अलावा, आधुनिक जीवन की कुछ स्थितियों के कारण आज का मनुष्य गंभीर तनाव से ग्रस्त है। रमजान में एक महीने का रोजा खासकर डायस्टोलिक दबाव कम करके इंसान के लिए काफी फायदेमंद होता है। हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार रोजे न केवल रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को मध्यम रखते हैं बल्कि इनसे रक्त वाहिकाओं को अपना काम बेहतर ढंग से करने में मदद मिलती है। नतीजतन दिल का दौरा, स्ट्रोक या स्ट्रोक जैसी विभिन्न हृदय रोगों का खतरा कम हो जाता है।

फेफड़े होते हैं स्वस्थ – फेफड़े सीधे रक्त को साफ करते हैं। रोजों का उन पर अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है। रोजे रखने से फेफड़ों में रक्त जमाव की शिकायत बहुत जल्दी दूर हो जाती है , कारण नलिकाओं की सफाई हो जाती है। रोजों की स्थिति में फेफड़े बहुत जल्दी अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकाल देते हैं, रक्त शुद्ध होकर पूरे शरीर में स्वास्थ्य की लहर दौड़ पड़ती है।

रमजान के रोज़ो में खान पान के अंतराल से लाभ — आम दिनों में यदि सेहरी और इफ्तार की तरह दिन में सिर्फ दो बार खाने की आदत बना ली जाए तो बहुत सी बीमारियों और परेशानियों से छुटकारा मिल सकता है। एक जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार भोजन और भूख के बीच का यह अंतराल बुढ़ापे में अल्जाइमर रोग से बचाने में मदद करता है।

रमजान के दौरान दान दक्षिणा के हैं मानसिक लाभ – रमज़ान के रोजों की इबादतों के साथ दान दक्षिणा का सिलसिला जारी रहता है । यह पुण्य कर्म लाभदायक बन कर व्यक्ति को मानसिक दोषों से बचाता है , इस प्रकार वह अवसाद, तनाव, भय और विभिन्न प्रकार की चिंताओं से बच जाता है।

Updated : 2022-04-04T02:08:20+05:30

Shubham Gote

Mr. Shubham Gote is involved in the day-to-day operations of the company along with the business expansion strategies of the print media division of the group. He also supervises the performance of the company in terms of the business plans. He has been on the Board of the Company since November 2009.

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