मोदी भक्त होना गलत नहीं पर अंधभक्त होना गलत है.

मोदी भक्त होना गलत नहीं पर अंधभक्त होना गलत है.

जाकीर हुसेन – 9421302699

हमारे देश में कभी भी कुछ भी हो सकता है प्रधानमंत्रीजी कभी भी कुछ भी कर सकते हैं. वो 8 नवंबर 2016 को अचानक रात को कहते हैं कि आज से 500 और 1000 के नोट बंद और तर्क ये देते हैं कि ऐसा करने से देश का कालाधन पकडा जाएगा. और देश का बढता हुआ आतंकवाद कम किया जाएगा. देश की भोली भाली जनता इस निर्णय का स्वागत करती है पर आज दो साल होने को है क्या देश का कालाधन पकडा गया? क्या देश के बढते आतंकवाद रोका जा सका? नहीं. .. और इस बात को साबित करता है आरबीआई का yearly report आरबीआई कहता है कि ये कोई सोची समझी साजिश नहीं थी बल्कि यह एक तानाशाही शासन का अहंकार भरा हुआ निर्णय था. और 99% कॅश जो सर्क्युलेशन में था वो बैंक में वापस आ गए हैं. 15 लाख 44 हजार करोड़ रुपये जो सर्क्युलेशन में थे उसमे से 15 लाख 28 हजार करोड़ रुपये बैक में वापस आ गये हैं. तो मोदीजी का ये दावा था कि जो कालाधन है वो पकडा जाएगा. जब सारा पैसा बैंक में वापस आ गया है तो कहा है कालाधन आपका आपने तो legalised कर दिया कालेधन को जितना कालाधन था सारा आपने व्हाईट में बदल दिया. जनता बेवकूफ नहीं है, और मुझे समझ नहीं आता कि ब्लॅक सुनते ही क्यों मोदीजी को और भक्तों को ऐसा लगता है कि सारा कालाधन सिर्फ कैश में है, कालेधन का सिर्फ 1% कॅश में है और इस 1% को पकडने के लिए इतने लोगों को परेशान कर दिया. वो भी एक टक्का आप पकड नहीं पाए. और बाकी 99% कब पकडेगे आप जो स्विस बैंक में है, सोना(gold) मे, प्रॉपर्टी में है उसे कब पकडेगे मोदीजी. एक टक्का पकडने के लिए आपने 100 से उपर जाने ले ली. कितने बच्चे अस्पताल में मर गए क्योंकि उनके पास पैसे नहीं थे कि इलाज करा सके. एक जान भी आप ले तो उसकी कीमत नहीं चुका सकते हैं, आपने तो 100 से उपर जाने ली है कैसे चुकाएंगे इसकी कीमत. एक टक्का पकडने के लिए आपने इतना किया पता नहीं 100% पकडने के लिए आप देश का क्या हाल कर देंगे. नष्ट करके रख देंगे देश को. आपने नये नोट छापने के लिए 21 हजार करोड़ रुपये खर्च किए हैं the cost of printing the new five and 2000 currency. 21000 करोड में देश का क्या क्या किया जा सकता था. कितने रोजगारों को रोजी दी जा सकती थी, कितने अस्पताल बनाए जा सकते थे, कितने स्कूल बनाए जा सकते थे, पिछले 70 सालों में जिन किसानों ने अपना कर्ज नही चुकाया था उनका कर्ज चुकाया जा सकता था, कितने गरीबो का घर बनाया जा सकता था पर नहीं मोदीजी ने अपने अहंकार में आकर ये निर्णय ले लिया. मोदीजी आपने जो 21000 करोड खर्च किए हैं क्या ये आपकी जिंदगी भर की कमाई थी? जी. ..नही. ..ये गरीब जनता ने जमा किया हुआ टॅक्स था, जो आपने युही गवा दिया. इसका मुनाफा क्या हुआ शुन्य और भक्तों को लगता है कि demonstration is success और हमारे देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कहते हैं कि नोटबंदी के वजह से देश का GDP 2% से कम हो जाएगा तब सारे बिजेपी के नेता उनपर हसते है, लेकिन एक महीने के अंदर देश का GDP 2% कम हो जाता है. मनमोहन सिंहजी की prediction इतनी स्ट्राँग है ऐसे इंसान का मजाक उडाते हुए आपको शर्म नहीं आयी.आप इलेक्शन कॅम्पेन में ये दावा करते रहे कि भाईयों बहनों मै देश का करप्शन खत्म कर दूंगा, नोटबंदी के वजह से हमारा देश दुनिया के करप्ट देशों के नंबर एक पर आ गया है. और ये मैं नहीं फोर्ब्स कहता है. एशिया का सबसे करप्ट देश हमारा है, क्या आपको इस बात का दुख नहीं है, आपने ये भी कहा था कि पाकिस्तान से नकली नोट छापकर आ रहे हैं मैं उसे रोकना चाहता हूं, लेकिन वो 2000 के नोट भी छपकर आ रहे हैं. क्या ये 2000 के नोट भी बंद कर देंगे आप? क्या फिर से जाने लेंगे नोटबंदी कर के? क्या बिजेपी में ऐसा एक भी नेता नहीं जिसके पास कालाधन ना हो. सारे मिनिस्टरो के पास कालाधन है, अंबानी, अडानी आपके मित्रों के पास कालाधन नही है, क्या अमित शाह, राजनाथ सिंह, अरुण जेटली के पास कालाधन नही है. किसके पास कालाधन नही है सबके पास कालाधन है. तो क्यों नहीं पकडते मोदीजी उनको अगर नहीं पकड सकते तो आप के नोटबंदी ने क्या किया. ? मैं मोदीजी से नफरत नहीं करता पर हा मै सच्चाई से प्यार करता हूँ सच बोलना धरम है मेरा तो सच आप तक पहुंचा रहा हूँ. मोदी भक्त होना गलत नहीं पर अंधभक्त होना गलत है.

Updated : 7 March 2022 6:00 AM GMT

Shubham Gote

Mr. Shubham Gote is involved in the day-to-day operations of the company along with the business expansion strategies of the print media division of the group. He also supervises the performance of the company in terms of the business plans. He has been on the Board of the Company since November 2009.

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