महिलाओं के उद्धारक पैगंबर-ए-इस्लाम (स.)

महिलाओं के उद्धारक पैगंबर-ए-इस्लाम (स.)

डॉ अदनान उल हक़ खान,नागपुर

अरब में आज से 1400 वर्ष पूर्व का समय अत्याचार और गुलामी से जुड.ा हुआ था. उस दौर में लोग ईश्‍वर की बजाय झूठे खुदाओं की भक्ति करते थे. अरबों में महिलाओं के साथ दुव्यर्वहार होता था. स्त्री का जन्म अभिशाप माना जाता था.

ऐसी स्थिति में पिता अपनी मासूम बेटी को जिंदा दफन कर देता था. शराब, मुनाफाखोरी, नशे की लत, सट्टा, जुआ खेलना आम बात थी. मनुष्य को गुलाम बनाया जाता था. गुलामों को मानवीय अधिकार प्राप्त नहीं थे. मामूली विवाद पर वर्षों युद्ध चलता. लूटमार, कत्ल से पूरा अरब भयभीत था. ऐसे कठिन समय में एक दिन मक्के की सरजमी पर एक सूरज उगा, वह दिन था कुरैश घराने के हजरत अब्दुल्लाह के घर में पैगंबर मोहम्मद (स.) के जन्म का.

अंधकार में डूबी मानवजाति को लेकर पैगंबर साहब बहुत चिंतित रहते थे. इसके लिए वे सृष्टि के रचयिता की प्रार्थना के लिए ‘हिरा’ की गुफा में जाया करते. इसी तरह से रमजान की एक रात में प्रेषित (स.) अल्लाह की उपासना कर रहे थे कि अचानक ईश्‍वर की ओर से जिब्राइल (अ.) (देवदूत) आए और पैगंबर साहब को प्रेषित का दर्जा प्रदान किया. अरब के लोग पैगंबर साहब को अमानतदार और सत्यवान कहते थे. प्रेषित (स.) ने अरब में समानता, शांति और नारी मुक्ति का संदेश आम कर पैगंबर-ए-इस्लाम (स.) महिलाओं के उद्धारक बने.

पैगंबर साहब ने कहा कि ‘ऐ लोगों तुममें से जिस किसी की तीन बेटियां और बहने हों और वह उसका पालन-पोषण करे तो ईश्‍वर उसे स्वर्ग देगा’. पैगंबर साहब ने अरब में फैले नस्लभेद, काले रंग वाले लोगों के प्रति उबलने वाले विरोध की लहर को भी जड. से उखाड. फेंका. मानवजाति की भलाई वाले अल्लाह के बताए हुए जीवनमार्ग को बताने में पैगंबर साहब को अरब में लोगों का जुल्म भी सहना पड.ा. जो दुनिया का सबसे बड.ा जिहाद था जिसे पैगंबर साहब ने अच्छाई के लिए सहन किया.

डॉ अदनान उल हक़ खान,नागपुर

Updated : 8 April 2022 12:19 AM GMT

Shubham Gote

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