भारत को श्रीलंका होने से बचाना मुश्किल है।

भारत को श्रीलंका होने से बचाना मुश्किल है।

भारत श्रीलंका से दूर नहीं है

जाकिर हुसैन – 9421302699

व्यक्ति हो या राष्ट्र, सोचे समझे बगैर कर्ज लेता जायेगा.. लेता जायेगा तो एक दिन डूबेगा जरुर। मेरे एक रीलेटीव ने 4% व्याज ( वार्षिक 48% व्याज ) देने वाले चीट फंड में पैसा रोका। उसे अच्छा लगा। उसने दूसरे लोगों से उधार लेकर 30 लाख रुपये चीट फंड में रोका। चीट फंड मेनेजर फोरेक्स फंड में इन्वेस्ट करते थे। छह महीने तक उसे अच्छा रीटर्न मिलता रहा। बाद में उसको रीटर्न मिलना बंद हो गया। वो टेंशन में आ गया। अब जिनसे पैसे लिये उनको चुकाये कैसे?

भारत सरकार भी कर्ज ले रही है। बस ले रही है। अब टेक्स बढ़ाकर आय हो रही तो देश चल रहा है। लेकिन टेक्स देने की लोगों की क्षमता की एक लिमिट होती है। जब उस क्षमता से उपर चले जायेंगे तब क्या होगा? कोर्पोरेट मित्र का टेक्स बढा नहीं सकते हैं। फिर क्या होगा?

आज मध्यम वर्ग का घर चलता है। जो लोग 30 हजार के आसपास कमा लेते हैं वे घर का खर्च चला लेते हैं लेकिन चार पांच साल के बाद घर खर्च चलाने के लिए 60 हजार की जरूरत पडेगी। तब ये लोग क्या करेंगे? 30 हजार से कम आय वाले भी करोड़ों लोग है। तीन चार साल बाद 100 करोड़ लोगों को घर खर्च निकालने में दिक्कत आयेगी। आज भी आ रही है लेकिन चार साल बाद दिक्कत असह्य बन जायेगी। पेट्रोल के दाम 200 से उपर होगा।

हम बिलकुल श्रीलंका के नजदीक पहुंच गए हैं। सरकार ने आर्थिक नीतियों में बदलाव नहीं किये तो भारत को श्रीलंका होने से बचाना मुश्किल है।

आप बताइए कि 2014 से लेकर आज तक हर चीज के भाव कितने बढे है?

दूसरी बात ये भी बताइए कि श्रीलंका से हम कितने दूर है?

रेस्नलिस्ट अनिल

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फुलप्रूफ

हम कुछ साथी

खारे समुद्र में डूब रहे थे

तभी कुछ नावें दिखीं

लेकिन जो बिल्कुल नहीं तैर सके

डूब गए

कुछ लोग किसी तरह

नाव तक पहुँच गए

नाव में छेद था

समूह ने निर्णय लिया

ये दुश्मनों की चाल है

नाव पर ही पैर मारने लगे

नाव टूट गई

कुछ डूब गए

कुछ दूसरी नाव तक आ गए

उसमें भी छेद था

वहाँ पर भी बहस

ये दुश्मनों की है

उसे भी तोड़ डाला

फिर आफ़त

सभी की हालत खराब थी

मैं नाव उनके पास ले गया

जब उन्हें पता चला

इस नाव में भी छेद है

दुश्मनों का ग़ुस्सा

सभी नाव पर उतारने लगे

मैंने कहा, भाइयों!

हम नाव के छेद को मूँद भी तो सकते हैं

यह हमें तट तक ले चल सकती है

इसके बाद हम फुलप्रूफ नाव बना लेंगे।

आर डी आनन्द

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Updated : 8 April 2022 4:10 PM GMT

Shubham Gote

Mr. Shubham Gote is involved in the day-to-day operations of the company along with the business expansion strategies of the print media division of the group. He also supervises the performance of the company in terms of the business plans. He has been on the Board of the Company since November 2009.

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